Motivational kahani in hindi


             दो मित्रों की motivational कहानी
      
Motivational kahani in hindi

एक बार दो लडकीयाँ जिनका नाम चित्रा और दूसरी का नाम पित्रा था। दोनो बहुत घने मित्र थे और दोनो एक ही कालेज और एक ही होस्टल में रहते थे। चित्रा चित्रकारी में बहुत अच्छी थी और उसी के अनूसार चित्रकारी का कोर्स भी कर रही थी। वही दूसरी तरफ पित्रा पत्रकारीता का कोर्स कर रही थी।साथ ही साथ पित्रा को समाज सेवा करना भी अच्छा लगता था। वो गरीबों को खाना देती थी और उनके बच्चों को पढाती भी थी। उसे ऐसा करना बहुत अच्छा लगता था।

उनके कालेज मे उनकी दोस्ती की मिसालें दी जाती थीं।  चित्रा जो भी अपने आस पास देखती उसका चित्र बना देती थी। चित्रा पेसे वाली थी और चित्रा का सपना था कि वो विदेश मे जा कर चित्रकारीता की पढाई करे । वहीं दूसरी तरफ पित्रा चाहती कि वो ऐसे ही गरीब लोगो की मद्दत करती रहे।

चित्रा का विदेश में नम्बर आ जाता हे और जाने से पहले वो अपने मित्रों से मिलती है मिलने के बाद वो अपने अध्यापक से मिलने जाती है। जाते जाते वो रास्ते मे देख्ती है कि दो गरीब बच्चे एक औरत से लिपट कर रो रहे थे,वो औरत उनकी माँ थी और वो भूख के कारण मर चुकी थी उनको देखकर चित्रा ने चित्रकारी करने का सोचा और वहाँ से चली गई। कुछ देर बाद उसी जगह से पित्रा गुज़रती है और उन बच्चो को देखती है और उन बच्चो के लिऐ कुछ करने का सोचती है।

वही चित्रा जाने के लिए train मे बैठ जाती  है और पित्रा का इनतजा़र करती है कि वो उसे छोडने आएगी पर ऐसा नही होता और train चल पडती है। विदेश मैं पहोच कर वो उन माँ और बेटौं का चित्र बनाती है और उसे प्रकाशित करती है और देखते ही देखते उसका चित्र बहुत मशहूर हो जाता है और वो कामीयाबी छूने लगती है और बहुत प्रसिद्ध हो जाती है।
      एक बार वह अपने किसी काम से भारत आती है और एक बहुत अच्छी party रखती है उसमे बडे बडे पत्रकारों को बुलाती है।उस party मे उसकी मित्र पित्रा भी अपने पति और दो बच्चो के साथ आती है, उसे देख चित्रा बहुत खुश होती है और पूछती है कि तूने शादी कर ली और दो बच्चे भी हो गये और तूने मुझे बताया भी नहीं। तो पित्रा जवाब में कहती है कि ये वही बच्चे हैं जिनका चित्र बनाके तू  आज यहाँ तक पहूची है। यह सुन चित्रा सन्न खडी रह जाती है।
                         
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